Theme :
Home
Granth
eBook
eSatsang
Saint
Leelaye
Temple
Yatra
Jap
Video
Doubt
Health
Pandit Ji

यदुवंशियो को ऋषियों का श्राप

  Views : 1146   Rating : 0.0   Voted : 0
submit to reddit  

महाभारत का युद्ध करवाकर भगवान ने पृथ्वी का भार तो कम कर दिया था,पर भगवान ने विचार किया कि यदुवंश मेरे आश्रित है.और जनबल,धनबल, और विशाल वैभव के कारण उच्छृख्ल हो रहा है.और किसी भी प्रकार पराजय नहीं हो सकता.जिस प्रकार बाँस के वन में परस्पर संघर्ष से उत्पन्न अग्नि के समान इस युदुवंश में भी परस्पर कलह खड़ा कराके, मै शांति प्राप्त कर सकूँगा, और इसके बाद अपने धाम में जाऊँगा.

 

 

भगवान सर्वशक्तिमान और सत्यसंकल्प है,उन्होंने इस प्रकार अपने मन में निश्चय करके ब्राह्मणों के शाप के बहाने अपने ही वंश का संहार कर डाला.अब भगवान श्रीकृष्ण महाराज उग्रसेन की राजधानी द्वारिकापुरी में वसुदेव जी के घर यादवो का संहार करने के लिये कालरूप से ही निवास कर रहे थे.उस समय – विश्वामित्र, असित, दुर्वासा, भृगु, अंगिरा, कश्यप, वामदेव, अत्रि, वसिष्ठ, नारद, आदि बड़े-बड़े ऋषि द्वारिका के पास ही पिण्ङारक क्षेत्र में जाकर निवास करने लगे थे.

 

 

एक दिन यदुवंश के कुछ उद्दण्ड कुमार खेलते-खेलते उनके पास जा निकले,उन्होंने बनावटी नम्रता से उनके चरणों में प्रणाम करके,प्रश्न किया वे जाम्बवतीनंदन साम्ब को स्त्री के वेष में सजाकर ले गये,और कहने लगे-ब्राह्मणों !यह कजरारी आंखोंवाली सुंदरी गर्भवती है यह आप से एक बात पूछना चाहती है आप लोगों का ज्ञान अमोघ है,इसे पुत्र की बड़ी लालसा है आप लोग बताइये यह कन्या जानेगी, या पुत्र? उन कुमारो ने इस प्रकार उन ऋषि-मुनियो को धोखा देना चाहा,तब वे भगवतप्रेरणा से क्रोधित हो उठे उन्होंने कहा-मूर्खो!यह एक ऐसा मूसल पैदा करेगी जो तुम्हारे कुल का नाश करनेवाला होगा वे बालक बहुत डर गये उन्होंने साम्ब का पेट खोलकर देखा तो सचमुच उसमे एक लोहे का मूसल मिला इस प्रकार वे बहुत घबरा गये और उनके मुख कुम्हला गये,उन्होंने भरी सभा में सब यादवो के सामने ले जाकर वह मूसल रख दिया और राजा उग्रसेन को जाकर सारी घटना कह सुनाई.

 

 

उग्रसेन ने उस मूसल को चूरा-चूरा करा डाला और उस चूरे और लोहे के बचे हुये टुकडे को समुद्र में फेकवा दिया.उस लोहे के टुकड़े को एक मछली निगल गयी और चूरा तरंगों के साथ बह-बहकर समुद्र के किनारे आ लगा वह थोड़े दिनों में एरक (एक घास)के रूप में उग आया मछली मरने वाले मछुआरो ने समुद्र में दूसरी मछलियों के साथ उस मछली को भी पकड़ लिया उसके पेट में जो लोहे का टुकड़ा था उसको जरा नामक व्याध ने अपने बाण के अपने नोक में लगा लिया.भगवान सबकुछ जानते थे वे इस शाप को उलट भी सकते थे फिर भी उन्होंने ऐसा करना उचित ना समझा कालरुपी भगवान ने ब्राह्मणों के शाप का अनुमोदन ही किया.

जय जय श्री राधे  

 

Send your Master/Guru/God article to support@radhakripa.com to add in radhakripa.
!! जय जय श्री राधे !!
Use following code to Embebd This Article in your website/Blog
Comments
2011-08-01 18:04:22 By Nidhi Nema

राधे राधे, ये आर्टिकल श्रीमद्भागवत से लिया गया है जो की वेदव्यास जी द्वारा लिखा गया है.पुराण को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती क्योकि श्रीमद्भागवत जैसे दिव्य पुराण के हर शब्द में राधा कृष्ण विराजमान है,

2011-07-30 16:52:24 By AKHILESH KUMAR YADAV(FIELD GUN FACTORY KANPUR)

NO ONE DESTROY YADAV VANS.BECAUSE VANS AMAR HAI.

2011-07-30 16:38:05 By AKHILESH KUMAR YADAV

Please tell me, what is reason for believing this story? tell me sourses

2011-05-08 17:31:59 By rajesh kumar yadav

fcydqy lgh ckr fy[kh xbZ gS ;nqoaf\'k;ks ds ckjs es

Enter comments


 
 
Tags :
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
एकादश स्कन्ध


Send your article to support@radhakripa.com
to add in radhakripa.
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
Copyright © radhakripa.com, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here but you need to include radhakripa logo and provide back link to http://radhakripa.com